Phule Movie Review : भारत के पहली महिला शिक्षिका की यह कहानी
Phule Movie परिचय
25 अप्रैल 2025 को रिलीज़ हुई फिल्म फुले, ज्योतिबा और सावित्रीबाई फुले के जीवन पर आधारित एक ऐतिहासिक बायोपिक है, जो 19वीं सदी में भारत की जातिगत और लैंगिक असमानताओं के खिलाफ उनके संघर्ष को दर्शाती है। निर्देशक अनंत नारायण महादेवन ने इस फिल्म के माध्यम से एक ऐसे युग को पर्दे पर उतारा है, जहाँ शिक्षा, विशेषकर महिलाओं और दलितों के लिए, एक सपना था। फिल्म न केवल इतिहास को सही ढंग से पेश करती है, बल्कि यह आज के समाज के लिए भी एक दर्पण का काम करती है।
इस Movie Review आर्टिकल में फिल्म की कहानी, उसकी ऐतिहासिक सत्यता, अभिनय, निर्देशन और सामाजिक प्रासंगिकता पर विस्तार से चर्चा करेंगे।
लेकिन इससे पहले जान लेते Savitribai Phule कौन थी और क्या करती थी।
सावित्रीबाई फुले: Savitribai Phule
सावित्रीबाई फुले (3 जनवरी 1831 – 10 मार्च 1897) भारत की पहली महिला शिक्षिका, समाज सुधारक और नारीवादी चिंतक महीला थीं। उन्होंने अपने पति ज्योतिबा फुले के साथ मिमिलकरश जाति और लैंगिक भेदभाव के खिलाफ अथक संघर्ष किया और महिलाओं व दलितों के शिक्षा अधिकार के लिए जीवनभर काम किया। उनका जीवन साहस, करुणा और क्रांति की मिसाल है।
Savitribai Phule प्रारंभिक जीवन और शिक्षा
Savitribai Phule का जन्म महाराष्ट्र के सतारा जिले के नायगाँव में एक दलित (माली) परिवार में हुआ था। उस समय लड़कियों को पढ़ाना पाप माना जाता था, लेकिन उनके पति ज्योतिबा फुले ने उन्हें पढ़ाया-लिखाया। सावित्रीबाई ने अंग्रेजी, मराठी और संस्कृत सीखी और बाद में खुद एक शिक्षिका बन गईं।
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फिल्म की कहानी : Phule Movie Story
Phule Movie की कहानी 1897 में पुणे में ब्यूबोनिक प्लेग (महामारी) के दौरान शुरू होती है, जहाँ सावित्रीबाई फुले (पत्रलेखा) संक्रमित मरीजों की मदद करते हुए दिखाई जाती हैं। यहीं से फिल्म फ्लैशबैक में चली जाती है और 1848 के उस दौर को दिखाती है, जब ज्योतिबा फुले (प्रतीक गांधी) ने अपनी पत्नी सावित्रीबाई को पढ़ाना शुरू किया और बाद में भारत का पहला लड़कियों का स्कूल खोला ।
फिल्म में जातिगत भेदभाव के कई तीखा दृश्य हैं, जो हमारे समाज का एक सच्ची इतिहास है जैसे:
- ब्राह्मणों द्वारा ज्योतिबा की छाया से दूर भागना क्योंकि एक "निम्न जाति" का व्यक्ति उन्हें "अशुद्ध" कर सकता था।
- सावित्रीबाई और फातिमा शेख (अक्षया गुरव) पर गोबर फेंका जाना, क्योंकि वे लड़कियों को पढ़ा रही थीं ।
- एक दलित व्यक्ति के गले में थूकने के लिए मटका और पीछे के पैरों के निशान मिटाने के लिए झाड़ू बाँधी जाती है ।
फिल्म सत्यशोधक समाज के गठन, विधवा पुनर्विवाह और बाल विवाह के खिलाफ फुले दंपति के संघर्ष को भी दिखाती है।
Phule Movie Actor: Acting
1. प्रतीक गांधी (ज्योतिबा फुले के रूप में)
प्रतीक गांधी ने ज्योतिबा फुले की भूमिका में एक शांत, दृढ़ और आंतरिक ताकत से भरपूर अभिनय किया है। उनकी आवाज़ और भाव-भंगिमाएँ उस युग के सामाजिक कार्यकर्ता की छवि को सही ढंग से अपना रोल अदा किया हैं ।
2. पत्रलेखा (सावित्रीबाई फुले के रूप में)
पत्रलेखा का अभिनय प्रेरणादायक और ऊर्जावान है। वह सावित्रीबाई के संघर्ष, साहस और दृढ़ता को बखूबी से दर्शाती हैं। एक दृश्य में जब कोई उन्हें धमकाता है, तो वह उसे थप्पड़ मारकर चली जाती हैं। यह दृश्य दर्शकों के लिए एक यादगार पल बन जाता है ।
3. Phule Movie सहायक कलाकार
- विनय पाठक (ज्योतिबा के पिता) ने एक रूढ़िवादी ब्राह्मण की भूमिका निभाई है, जो अपने बेटे के सुधारवादी विचारों से सहमत नहीं है।
- जॉय सेनगुप्ता एक कट्टर ब्राह्मण नेता की भूमिका में प्रभावी हैं।
- दर्शील सफारी (यशवंत फुले, उनके दत्तक पुत्र) ने भी एक छोटी लेकिन महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है ।
Phule Movie Release Date
Phule Movie Release date को लेकर कुछ बदलाव हुए। शुरू में यह फिल्म 11 अप्रैल 2025 को रिलीज होने वाली थी, जो ज्योतिराव फुले की 197वीं जयंती के साथ मेल खाती थी। लेकिन महाराष्ट्र में कुछ ब्राह्मण संगठनों द्वारा फिल्म में उनकी समुदाय की छवि को लेकर आपत्तियों के बाद, सेंट्रल बोर्ड ऑफ फिल्म सर्टिफिकेशन (CBFC) ने कुछ बदलावों की मांग की। इन बदलावों में जाति व्यवस्था से संबंधित कुछ संवादों और दृश्यों को हटाना शामिल था। नतीजतन, फिल्म की रिलीज को दो सप्ताह के लिए टाल दिया गया।
आधिकारिक रिलीज डेट: फिल्म 25 अप्रैल 2025 को पूरे भारत में सिनेमाघरों में रिलीज हुई।
Phule Movie Box office collection
पहले दिन का कलेक्शन:फिल्म ने पहले दिन भारत में केवल 21 लाख रुपये नेट का कलेक्शन किया। यह बहुत कम ओपनिंग थी, खासकर प्रतीक गांधी की पिछली फिल्म "दो और दो प्यार" की तुलना में, जिसने पहले दिन 80 लाख रुपये कमाए थेपहले वीकेंड का कलेक्शन:पहले तीन दिनों में फिल्म ने भारत में 1.05 करोड़ रुपये नेट कमाए।दिन 1: 15 लाख रुपयेदिन 2: 30 लाख रुपयेदिन 3: 60 लाख रयह कलेक्शन बेहद कम रहा, और फिल्म को दर्शकों का ज्यादा समर्थन नहीं पहले सप्ताह का कलेक्शन:पहले सप्ताह में Phule Movie ने भारत में 2.10 करोड़ रुपये नेट और विश्वव्यापी स्तर पर 2.67 करोड़ रुपये ग्रॉस का कलेक्शन किया। ओवरसीज में फिल्म ने केवल 0.17 करोड़ रुपये कमाए।14 दिनों का कलेक्शन:14वें दिन तक, फिल्म ने भारत में 3.71 करोड़ रुपये (नेट) और विश्वव्यापी स्तर पर 4.23 करोड़ रुपये ग्रॉस का कलेक्शन किया। 14वें दिन फिल्म ने केवल 22 लाख रुपये कमाए।कुल कलेक्शन (अंतिम आंकड़े):कुछ रिपोर्ट्स के अनुसार, फिल्म ने भारत में 5.07 करोड़ रुपये नेट और विश्वव्यापी स्तर पर 6.21 करोड़ रुपये (ग्रॉस) कमाए
निर्देशक: Phule Movie Director
निर्देशक अनंत नारायण महादेवन ने इस फिल्म को एक डॉक्यूमेंट्री जैसी गंभीरता के साथ बनाया है। उन्होंने किसी भी तरह के मेलोड्रामा या ओवर-द-टॉप भावनात्मक दृश्यों से परहेज किया है, जिससे फिल्म की ऐतिहासिक प्रामाणिकता बनी रहती है ।
हालाँकि, कुछ आलोचकों का मानना है कि फिल्म थोड़ी धीमी और शैक्षणिक लग सकती है, क्योंकि यह बहुत सारे ऐतिहासिक घटनाक्रमों को एक साथ दिखाने की कोशिश करती है—जैसे 1857 का विद्रोह, फ्रांसीसी क्रांति और अब्राहम लिंकन द्वारा दासता का उन्मूलन ।
फिल्म का सिनेमेटोग्राफी और प्रोडक्शन डिज़ाइन 19वीं सदी के महाराष्ट्र को जीवंत कर देता है।
फिल्म Phule से लोगों को संदेश
फुले दंपति का संघर्ष आज भी उतना ही प्रासंगिक है, क्योंकि:
- जातिगत भेदभाव आज भी कई रूपों में मौजूद है।
- महिला शिक्षा आज भी ग्रामीण इलाकों में एक चुनौती है।
- फिल्म का अंतिम संदेश— जाति व्यवस्था अब इतिहास की बात है - एक विवादास्पद बयान है, क्योंकि वास्तविकता अलग है ।
Phule Movie की आलोचनाएँ और कमियाँ
1. फिल्म की गति धीमी है और कुछ दृश्य रिपोर्ट जैसे लगते हैं ।
2. कुछ संवाद नाटकीय लगते हैं, जो फिल्म के यथार्थवादी टोन से मेल नहीं खाते ।
3. हिंदी में बनने के कारण कुछ दर्शकों को लगा कि यह फिल्म मराठी में होनी चाहिए थी ।
निष्कर्ष:
क्या Phule Movie देखने लायक है?
हाँ, दोस्तों अगर आप इतिहास और सामाजिक बदलाव में रुचि रखते हैं। यह फिल्म एक शिक्षाप्रद और प्रेरक अनुभव देती है, हालाँकि यह पारंपरिक मनोरंजन की तलाश वालों के लिए नहीं है। प्रतीक गांधी और पत्रलेखा के शानदार अभिनय, सच्ची घटनाओं पर आधारित कहानी और सामाजिक संदेश के कारण यह फिल्म एक महत्वपूर्ण सिनेमाई योगदान है । आपको और अपने बच्चे को भी ऐसी फ़िल्मे दिखानी चाहिए ।
रेटिंग: ★★★½ (3.5/5)
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